मनुष्य की मुक्ति : अपने भीतर की यात्रा प्रत्येक जीवन की अंतिम समस्या उसी के भीतर निहित है, और उसका अंतिम समाधान भी। बाहर की परिस्थितियाँ केवल उन समस्याओं को आकार देती हैं, जिन्हें भीतर की चेतना अपने ढंग से अनुभव करती है। इसीलिए दो मनुष्य एक ही दुःख से गुजरकर भी उसे अलग-अलग ढंग से अनुभव करते हैं। Source: Hindikunj.com
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